आइये मिलते है एक अज़ीम शख्सियत से 1

आइये मिलते है एक अज़ीम शख्सियत से

अम्बेडकर नगर व्यक्तित्व

समाजिक सरोकारों का सजग कवि-जिज्ञासु

जी हाँ हम बात कर रहे हैं एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी शिक्षक, कवि व मंच संचालक श्री तारकेश्वर मिश्रा जिज्ञासु जी कीजो शिक्षा साहित्य और मंच की दुनिया में एक बेहतर मुकाम रखते है नये जमाने की नई तहजीब जहाँ रिश्तों में अकुलाहट है , बेचैनी है, असंतुलन है, भेद-भाव है, ऐसे में एकता, भाई चारा और संतुलन बनाने का जो कसम हमेशा सर साहित्य करता आ रहा है, आज उसी सहित्य के चमकते नामों में से एक नाम है जिज्ञासु जी का।

बानगी के तौर पर एक नज़र डालेंगे जिज्ञासु जी के साहित्य पर।
युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए एक सेर श्री तारकेश्वर जी का

पहले वो दर तो तलाशो जहााँ पर बुनियााद पक्की हो,      दलदल ज़मीं पे  महल बनाने ल  ख्वाब  फिजुल है।

उन्होंने अपनी कविताओं से न सिर्फ युवाओं को बल्कि माँ बाप को भी बहुत से सन्देश दिये हैं,

तेरे औलाद की सारी खामियाँ दूर हो जाएं बेशक,     सवाल  ये  है तुम  भी  तो  अपना रवैय्या  बदलो।

बेटियों  की   परवरिश  यूँ  आसान  नहीं   होती,         दौरे नुमाइश में यूं इज़्ज़त बचानी आसान नहीं होती,                                                                 पाबंदियां और नसीहतों के साथ मशक़्क़त माँ बाप की,                                                         मंज़िलें सपनों की हसरतें जीत की यूँ आसान नहीं होतीं।

शहरों की चकाचौंध में इंसानियत तमाशा है,     हर  चेहरा  मायूस ,  हर  दिल  में हताश है, पत्थर  की दुनिया में जज़्बातों का मोल नहीं,      हर  तरफ  वीरानी  है, हर  तरफ निराश है।

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