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कांग्रेस (Congress) की वरिष्ठ नेता और दिल्ली (Delhi) की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (Sheila Dixit) का निधन

राजनीति व्यक्तित्व

नई दिल्‍ली: कांग्रेस (Congress) की वरिष्ठ नेत्री और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीली दीक्षित (Sheila Dixit) का शनिवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। शीला दीक्षित (Sheila Dixit) कांग्रेस की अध्यक्ष भी थीं और काफी लंबे समय से बीमार चल रहीं थीं। तीन बार शीला दीक्षित (Sheila Dixit) की बाईपास सर्जरी हुईं थी और आज सुबह उल्टी की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली के एस्कार्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शीला दीक्षित (Sheila Dixit) का अचानक निधन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री (CM) रही शीला दीक्षित (Sheila Dixit) 1998 से लेकर 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। 81 साल की शीला दीक्षित (Sheila Dixit) को कांग्रेस (Congress) का कद्दावर नेता माना जाता था। उत्तर प्रदेश (UP) में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उन्हें अपना मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया था हालांकि चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था।
शीला दीक्षित (Sheila Dixit) का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब (Punjab) के कपूरथला में हुआ है। शीला दीक्षित ने दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की। उनका विवाह उन्नाव (यूपी) के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीलाजी एक बेटे और एक बेटी की मां हैं। उनके बेटे संदीप दीक्षित भी दिल्ली के सांसद हैं. दरअसल, मिरांडा हाउस से पढ़ाई के दौरान ही उनकी राजनीति में रुचि थी।

शीला दीक्षित (Sheila Dixit) तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं

शीला दीक्षित (Sheila Dixit) अपने काम की बदौलत कांग्रेस (Congress) पार्टी में पैठ बनाती चली गईं। सोनिया गांधी (Soniya Gandhi) सामने भी शीला दीक्षित (Sheila Dixit) की एक अच्छी छवि बनी और यही वजह है कि राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के बाद सोनिया गांधी (Soniya Gandhi) ने उन्हें खासा महत्व दिया। साल 1998 में शीला दीक्षित (Sheila Dixit) दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष बनाई गईं। 1998 में ही लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित (Sheila Dixit) कांग्रेस के टिकट पर पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ीं, मगर जीत नहीं पाईं। उसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ना छोड़ दिया और दिल्ली की गद्दी की ओर देखना शुरू कर दिया. दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि तीन-तीन बार मुख्यमंत्री भी रहीं।

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