पत्रकार ने समझा माँ का दर्द 1

पत्रकार ने समझा माँ का दर्द

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ये हैं मुजफ्फपुर के एक लोकल न्यूज़ चैनल के पत्रकार आमिर जी..

आज की अपनी रिपोर्टिंग के दौरान अचानक इन्होंने देखा कि..पानी टंकी, चौक के निकट संदिग्ध बुखार से संक्रमित बच्चे को अपनी गोद में लिए रो रही मां की कोई सहायता करने वाला नहीं है..शायद उस मां पता भी नहीं था कि बच्चे को हाॅस्पीटल पहुंचाने का रास्ता कौन सा है..

ये देख कर आमिर जी ने रिपोर्टिंग छोड़ मां और उस बच्चे को अपनी बाइक पर लेकर निकटवर्ती अस्पताल पहुंच गए और वहां बच्चे को भर्ती कराया..साथ ही उसका इलाज शुरू कराया..

जब बच्चे की स्थिति में कुछ सुधार हुआ तब वहां से वापस अपने कार्यक्षेत्र की ओर चले..

वैसे मैं आपको बता दूं की अगर इनकी जगह शायद किसी नेशनल चैनल का पत्रकार होता तो मदद करने के बजाए हो सकता है वो तड़प रहे बच्चे की मां के मुंह में प्रेस माइक लगा कर समाज व सरकारी व्यवस्था पर धड़ाधड़ रिपोर्टिंग करता..और आपको बताता की सरकार औऱ सिस्टम कितना नकारा है..वो एक एम्बुलेंस तक नहीं भेज पा रहा है बच्चे के लिए..बच्चे की टूटती हर सांस को वो चैनल की टीआरपी में तब्दील करने की पूरी कोशिश करता..!

पत्रकारिता जगत के असली हीरो आमिर भाई को हमारा सलाम..

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